Wednesday, May 6, 2020

"भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रदर्शनकारियों को देशद्रोही बनाने की चेष्टा करना ही देश का दुर्भाग्य है"





"भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रदर्शनकारियों को देशद्रोही बनाने की चेष्टा करना ही देश का दुर्भाग्य है"




आइए हम आपको बताते हैं कि क्या है वास्तविक सच्चाई संत रामपाल जी महाराज जी  के जेल जाने का पीछे 👇👇


संत रामपाल जी महाराज ने सभी सर्व धर्म ग्रंथ प्रमाणित ज्ञान आज मानव जाति को दिया  संत रामपाल जी का उद्देश्य सर्व धर्म ग्रंथ प्रमाणित तत्व ज्ञान  देकर भारतवर्ष को सर्व बुराइयों से रहित बनाना है।

 संत रामपाल जी महाराज ने अपने गुरु रामदेव आनंद जी महाराज के आदेश अनुसार अपना आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचार हरियाणा प्रांत से शुरू किया जिसका एकमात्र उद्देश्य है भारतवर्ष को नशा , भ्रष्टाचार , दहेज  आदि बुराइयों से पूर्ण रूप से मुक्त करना ताकि  भारत फिर से सोने के चिड़िया के नाम से विश्व में प्रसिद्ध हो।



 जैसे कि पहले ही वर्णन किया गया है कि संत रामपाल जी का तत्वज्ञान शास्त्र प्रमाणित है तथा पृथ्वी घूमती है इस उदाहरण की तरह पूर्णरूपेण सत्य है जिसका विरोध वर्तमान समय में प्रसिद्ध धर्मगुरु तथा आचार्य जनों ने स्वीकार नहीं किया जिसके परिणाम स्वरूप सन 2006 में आर्य समाज के आचार्यों ने अपने अनुयायियों को  संत जी  के विरुद्ध भड़काया तथा उस समय के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा  जो खुद एक आर्य समाज ही था  को भ्रमित कर अपने पक्ष में कर आश्रम से संत रामपाल जी महाराज को भगाने तथा आश्रम पर कब्जा करने की योजना बनाई तथा 12 -07 2006 को आश्रम जिला रोहतक पर आक्रमण कर दिया जिसमें लगभग 30,000 आर्य समाज ने लाठी-डंडे तथा हथियार लेकर धावा बोल दिया पुलिस ने रोकने की कोशिश की जिससे एक युवक मारा गया उस मृत युवक का मुकदमा नंबर 158 /2006 पुलिस स्टेशन सदर रोहतक पर झूठा मुकदमा बनवाया ।सभी उच्च अधिकारियों की उपस्थिति में आश्रम के संचालक संत रामपाल जी एवं उनके कुछ अनुयायियों पर गलत धाराएं लगाई गई।





जब संतजी के अनुयाई ने अपनी बात सेशन कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक रखी तो उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

  मुख्य गवाह जिसके नाम से f.i.r. लिखी गई उसने कोर्ट में बयान दिया कि मेरे से पुलिस ने कोरे कागज पर दस्तखत करा लिए मुझे नहीं पता करोथा में क्या हुआ था फिर भी सेशन जज ने केस समाप्त नहीं किया सेशन जज सुशील कुमार गुप्ता ने केस को समाप्त करने के लिए ₹300000 की रिश्वत मांगी आश्रम संचालक व उनके अनुयायियों ने इतनी धनराशि देने में असमर्थता जताई तो उनके ऊपर  जुल्म करना शुरू कर दिया संत रामपाल जी की स्थाई हाजिरी माफ कर रखी थी परंतु बिना किसी कारण के उसे कैंसिल कर उन्हें 14 जुलाई 2014 को कोर्ट में हाजिर होने के लिए आदेश दिया गया जब हमने सेशन जेंट्स की शिकायत मुख्य न्यायाधीश पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में की तथा सर्व घटना बताई तो उल्टा हाईकोर्ट ने हम पर सख्त बर्ताव किया हाई कोर्ट के कुछ भ्रष्ट जजों की आज्ञा से 14 -07- 2014 को संत रामपाल जी तथा 38 अनुयायियों को जेल में डाल दिया और उनकी बेल बांड कैंसिल कर दी जब संगत को यह पता चला तो लाखों की संख्या में अपने गुरु संत रामपाल जी के दर्शन करने के लिए तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रदर्शन करने के लिए हाथ में सत साहिब का बैनर लेकर रोहतक के लिए रवाना हो लिए दिनांक 13 -07 2014 को शाम तक कई हजारों की संख्या में बस स्टैंड रोहतक के सामने वाले पार्क में एकत्रित  हो गए रोहतक प्रशासन को जब इस बात की भनक लगी तो उन्होंने केवल संत रामपाल जी की हाजिरी वीडियो से  लगना  तय   हुई   उसी के लिए  रामपाल जी महाराज अपनी हाजिरी लगवाने के लिए हिसार कोर्ट में सेशन जज रोहतक के आदेश अनुसार 14 -7-2014 को सुबह 10:00 बजे पहुंच गए उनके दर्शनों के लिए हिसार कोर्ट के आसपास के हजारों की संख्या में अनुयाई पहुंच गए।
 राष्ट्र समाज सेवा समिति के सदस्य अपने काले रंग के पोशाक पहनकर संत जी की सुरक्षा के लिए उनके साथ कोर्ट परिसर तक गए ।
 रामपाल जी उस दिन सुबह कोर्ट में गए अपनी वीडियो conference से हाजिरी लगवाने के लिए साथ में उनके राष्ट्रीय समाज सेवा समिति के कुछ सदस्य संत जी के साथ काली पोशाक पहन कर उनके साथ कोर्ट परिसर तक गए परन्तु वे सभी कोर्ट परिसर के बाहर ही खड़े रहे। 




  उसी समय दो वकील जबरन वीडियो कॉन्फ्रेंस कक्ष में घुसे आर्य समाजी थे उन्होंने पूर्व नियोजित योजना के तहत संत रामपाल जी महाराज पर हाथापाई करनी चाहिए परन्तु स्प ने उनको सफल नहीं होने दिया उन्होंने शेष वकीलों को गुमराह कर वकीलों की हड़ताल करा दी और संत रामपाल जी महाराज पर कोर्ट एक आरोप लगाया  की उनके शिष्यों ने कोर्ट की अवमानना की है और कोर्ट की कार्यवाही में दखल डाली है इसी के तहत उन पर संत रामपाल जी महाराज पर कोर्ट की अवमानना का केस बनाया।
 इसको कह सकते हैं कि तानाशाही सरकारी कागज स्याही और लिखने वाले माननीय भ्रष्ट जज और वकील इसी केस के तहत चार बार संत रामपाल जी महाराज और उनके जो राष्ट्र समाज समिति के सदस्य थे उनको कोर्ट में हाजिर होने के लिए  तारीके बदली गई ।
जो अंतिम तारीख दी गई वह थी 10 -11- 2014 जिसमें कि संत रामपाल जी महाराज के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया गया जिसमें उन्हें 10 -11 -2014 को हाजिर होने के लिए कहां गया बरवाला आश्रम में पूरे वर्ष के पूर्व से निर्धारित सत्संग कार्यक्रमों का सत्संग दिनांक 7 -11-14 से 9-11 -14 तक शुरू हुआ 
 सत्संग कार्यक्रम के बीच ही दिनांक 8-11 -2014 को शाम के 3:00 बजे अचानक संत जी अस्वस्थ हो गए उन्हें बरवाला के डॉक्टर अनंतराम ने चेक किया उनकी छाती में बहुत तेज दर्द था।
प्रशासन को जब ये खबर  दी गई तो इस बात की पुष्टि करने के लिए सरकारी अस्पताल हिसार से डॉक्टर की एक पैनल गठित की गई जिसने संत जी के स्वास्थ्य की जांच आश्रम में जाकर कि उन्होंने भी उन्हें 72 घंटे का बेड रेस्ट के लिए कहां और हिदायत दी कि वह इस समय कहीं की यात्रा ना करें 10 -11 -2014 को जिस दिन संत जी को कोर्ट में पेश होना था  ।
उस दिन उनका स्वास्थ्य सही ना होने के कारण मेडिकल पेश किया गया परंतु दुर्भाग्यवश जज श्री M Joypaul ने उसे अस्वीकार कर दिया और जब साहिबान ने एक भी ना सुनी उधर संत जी को आईसीयू में ऑक्सीजन पर रखा हुआ था दिनांक 14 -11 2-014 को प्रशासन ने आश्रम की बिजली पानी की लाइन काट दी और संत जी को हर हाल में हर हाल में पेश होने के लिए आदेश दिया जबकि डाक्टर ने उन्हें 19 -11 -2014 तक ठीक होने का आश्वासन दे रखा था ।




सरकार ने पुलिस के उच्च अधिकारियों के साथ मिलकर आश्रम पर रॉकेट बम और आंसू गैस के गोले आवश्यकता से अधिक मात्रा में फेंके सर्दी के ठंडे मौसम में ठंडी पानी की बौछार लगातार मारकर अत्याचार किए आश्रम में  मौजुद महिलाओं ,बच्चों ,रोगियों आदि सभी पर अत्याचार किए जो उस समय आश्रम में या आश्रम के बहार सरकार के अत्याचार का विरोध कर रहे थे।
  पुलिस द्वारा किए गए अत्याचार  के कारण 5 स्त्रियों तथा एक बच्चे की मृत्यु हो गई लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर राज्य सरकार की जिद थी कि वे हर हाल में संत जी को गिरफ्तार करके ही रहेंगे जब संत रामपाल जी का बेड रेस्ट का समय पूरा हुआ तो उन्होंने खुद को पुलिस को आत्मसमर्पण कर दिया संत रामपाल जी महाराज जी आप समर्पण करने के बाद पुलिस वालों ने आश्रम में घुसकर वहां उपस्थित सभी वृद्धि स्त्री ,बच्चे सभी पर अत्याचार किए और इस मीडिया ने संत जी को बदनाम करने के लिए पुलिस के साथ मिलकर  वस्तुएं रखकर मीडिया में दुष्प्रचार किया ।


यदि वे वस्तुएं तथा अब वह सच्ची थी तो चालान के समय कोर्ट में पेश क्यों नहीं की गई।
 पुलिस ने भक्तों को मारपीट कर मनचाही कहानियां लिखकर दस्तखत करा लिए और अजीबोगरीब गवाह तैयार कर संत जी पर देशद्रोह का मुकदमा बना दिया इसे कहते हैं जल्लाद कर्म करना तथा अन्याय और अत्याचा कर निस्पाप व निरपराध   भगतो पर बल का दुरुपयोग करके पापों को इकट्ठा करना।
  इस पूरे दृष्टांत से आप सभी समझ ही गए होंगे कि बरवाला घटना और संत जी पर जो भी केस बनाए गए वह निराधार है और संत जी पूर्ण रूप से निर्दोष है।

 यह सब सोची समझी चाल थी पुलिस प्रशासन, सरकार और आर्य समाजियों की।
 आप यदि इस विषय में और विस्तृत जानकारी जानना चाहते हैं तो संत जी की वेबसाइट से डाउनलोड कर पुस्तक पढ़े
" बरवाला की घटना की सच्चाई"
        
।।।।धन्यवाद।।।